चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं

By | January 11, 2018

सारांश: चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं : चम्बा! जब कभी भी इस शब्द को सुनता हूँ तो चम्बा के प्राकृतिक सौन्दर्य और सांस्कृतिक विविधताओं की सुगंध का ध्यान मात्र ही मेरे अन्तर्मन को विस्मित कर देता है! चम्बा! एक ऐतिहासिक रियासत, जो इस क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक परिवर्तनों की साक्षी बनी! चम्बा रियासत! जिसने, अपनी पडोसी रियासतों से अपेक्षाकृत तीव्रगामी उन्नति की, चाहे वो निर्माण हो, स्वास्थ्य हो, संचार हो, कृषि-बागवानी हो या पन-विद्युत् उत्पादन हो! इस रियासत की समृधि का आभास इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश में विलय के दौरान सबसे ज्यादा नक़द राशि इसी रियासत ने ही दी थी!

चम्बा रियासत

चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं:

गत 4-5 दशकों में हिमाचल प्रदेश ने तीव्रता से आर्थिक और प्रौद्योगिक उन्नति की है! मुझे गर्व है कि मैं भी इस देव-भूमि से सम्बन्ध रखता हूँ, जिसकी प्रति व्यक्ति वार्षिक आय भारतवर्ष में सबसे ज़्यादा है! इसके लिए, मैं धन्यवाद करता हूँ हमारे देश एवं प्रदेश की लोकतांत्रिक और नौकरशाही प्रणाली का, जिन्होंने इसमें एक अहम् योगदान दिया है! साथ ही हिमाचल प्रदेश के जन-मानस का, जिन्होंने अपने परिश्रमी, उदार और ईमानदार स्वभाव से पूरे देश में ही नहीं, अपितु वैश्विक-पटल पर एक विशेष छाप छोड़ी हैं!

परन्तु, विकास का एक पहलू और भी है! अभी भी कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जो किन्हीं कारणवश विकास की इस प्रक्रिया में पिछड़ गये और आज के इस दौर में जिनको सशक्त करने की आवश्यकता है! मैं आशा करता हूँ कि मेरे विचारों को मेरे प्रिय पाठक, विकास के इस महाकुम्भ में एक तुच्छ योगदान-स्वरुप लेंगे व किसी प्रकार के राजनीतिक विचारों से जोड़कर नहीं देखेंगे!

चम्बा क्षेत्र एवं मुख्य उपलब्धियां:

चम्बा, हिमाचल प्रदेश के बारह ज़िलों में से एक है! यह जिला दक्षिण-पश्चिम दिशा में पंजाब राज्य व उत्तर-पूर्व दिशा में जम्मू-कश्मीर राज्य के साथ अपनी सीमाएं सांझा करता है! चम्बा क्षेत्र में बहु-सांस्कृतिक और भौगोलिक-मौसमीय विविधताएं हैं! चम्बा में हिमाचल प्रदेश के अन्य जनजातीय क्षेत्रों की अपेक्षा सबसे ज्यादा जनजातीय आबादी (जिनमें गद्दी, गुज्जर और पंगवाल मुख्य हैं) है, यह चंबा जिला की आबादी की 25% से भी ज्यादा है! अकेले चंबा क्षेत्र में ही चार कृषि- मौसमीय कटिबंध हैं, अतः जैव-विविधता से परिपूर्ण है यह क्षेत्र!

हस्त-शिल्प

चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं:

अब बात करना चाहूँगा इस क्षेत्र की मुख्य उपलब्धियों/ विशेषताओं की! चम्बा क्षेत्र का इतिहास 1500 वर्षों से भी प्राचीन है, जो आज भी जीवंत है! अगर चम्बा शहर के विकास की बात करें, तो यहाँ 1910 में बिजली पहुँच चुकी थी, जबकि पडोसी राज्यों में बिजली काफी समयोपरांत आई! देश की प्रथम पन-विदयुत परियोजना (मैगावाट) स्थापना का श्रेय भी चम्बा को ही जाता है!  कभी चम्बा एक पूर्ण आत्म-निर्भर रियासत थी और केवल नमक का ही आयात करती थी! स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी चम्बा कहीं आगे रहा था, जब यहाँ सन 1880 के प्रारम्भ में ही एशिया महाद्वीप का पहला कुष्ठ-रोग चिकित्सा केंद्र आरम्भ हो गया था! इसी दशक के मध्य में यहाँ डाक-सुविधा भी आरम्भ हो गई थी! 20वीं सदी के आरम्भ में ही यहाँ शिक्षा व्यवस्था के विकास का प्रारूप तैयार हो रहा था! लोकतांत्रिक योगदान की बात करें, तो चम्बा क्षेत्र ने ही हिमाचल प्रदेश को पहला विधानसभा अध्यक्ष दिया है! कला-क्षेत्र में चम्बा के योगदान को इसी बात से समझा जा सकता है कि यहाँ से 2 पदमश्री (कुल तीन: एक तकनीकी क्षेत्र से हैं) और 10 राष्ट्रीय अवार्डी अकेले कला-क्षेत्र से सम्बन्ध रखते हैं! चम्बा क्षेत्र में 30 से ज्यादा पारम्परिक वाद्ययंत्र हैं! हस्त-शिल्प के क्षेत्र में विशेषतय: चम्बा रूमाल ने अपनी एक विशेष पहचान वैश्विक-पटल पर अंकित की है!

चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं:

चम्बा क्षेत्र के हिमाचल प्रदेश में विलय के उपरान्त शुरूआती दौर में विकास ने गति पकड़ी और अधोसंरचना विकास पर इस क्षेत्र में काफ़ी कार्य किया गया! प्रदेश का पहला सामुदायिक विकास खण्ड भी चंबा जिला के भट्टियात में स्थापित हुआ! शुरू में केन्द्रीय अनुदान और बाद में केंद्र शासित प्रदेश बनने के इस दौर में विकासीय उतार-चढाव चलते रहे! अंततः 1971 में पूर्ण राज्य का दर्ज़ा मिलने के उपरान्त हिमाचल प्रदेश राज्य ने विकास की नई यात्रा आरम्भ की!

इसे विडम्बना ही कहूँगा, कि किन्हीं कारणवश अपने हिमाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्र विकास की इस गति में क़दम से क़दम मिलकर चल न सके और उनमें से चम्बा भी एक है! मेरा अपना यह मानना है कि इन क्षेत्रों के पीछे रह जाने का सबसे मुख्य कारण यहाँ की विषम भौगोलिक परिस्थितियां रहीं और शासन के पास उस समय संसाधनों का भी अभाव रहा होगा, क्योंकि इतने बड़े हिमाचल प्रदेश में किसी क्षेत्र विशेष पर ध्यान केन्द्रित करना भी कठिन ही प्रतीत होता है!

चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं:

चंबा के विकास-विकल्प:

चंबा में कृषि-बागवानी उत्पादों को विपणन हेतु बेहतर प्रबंध स्थापित हों, जिससे कृषि-बागवानी को प्रोत्साहन मिले! चम्बा में समुदाय आधारित पर्यटन के विकास हेतु प्रयास किये जाएँ, जिससे पर्यटन से लाभ का एक मुख्य भाग आम जन-समुदाय को मिले! मक्की की फसल की मूल्य-श्रंखला का सुदृढ़ीकरण होना चाहिए व इसके मूल्य-संवर्धन हेतु प्रयास करने चाहिए! चम्बा के हस्त-शिल्प उत्पादों को चम्बा-रुमाल की तर्ज़ पर वैश्विक-पहचान दिलाने हेतु इनके विपणन और ब्राण्डिंग पर प्रयास करने की आवश्यकता है!

हस्त-शिल्प उत्पाद

अगर संभव हो तो, चंबा जिले में चल रही पन-विद्युत् परियोजनाओं के लाभ की 20% राशि चम्बा में विकासात्मक कार्यों पर खर्च हो! केलाड-लेह मार्ग के विकास पर कार्य करने से जनजातीय समुदाय और पर्यटन को तो लाभ मिलेगा ही, अपितु सामरिक दृष्टी से भी हम सुदृढ़ बनेंगे! चंबा क्षेत्र में संभवत: सुरंग निर्माण परिवहन को तीव्रगामी स्वरुप देगा व विकास के अन्य प्रयासों को भी सहायता करेगा! इसके साथ –साथ मूलभूत आवश्कताओं जैसे बिजली की निरन्तर उपलब्धता (कम वोल्टेज व बिजली का बार बार जाना) में भी सुधार करने की आवश्कता है!

चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं:

उपसंहार:

आज के इस परिपेक्ष्य में जब प्रौद्योगिकीय विकास ने अगम्य को भी सुगम्य बना दिया है, हम सबको मिलकर एक प्रयास अवश्य करना चाहिए, इन क्षेत्रों के विकास के लिए! विकास करना केवल सरकार और विभागों की ही ज़िम्मेदारी ही नहीं है अपितु, जन-मानस को भी इसमें बढ़-चढ़ कर सहयोग करना होगा! अभी हाल ही में पांगी-भरमौर के एक क्षेत्र को खुला-शौच मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर जो उदाहरण प्रस्तुत किया, हम सबको प्रेरणा देता है! चम्बा जैसे क्षेत्रों  में कार्य करने के अवसर को दंड स्वरुप देखने के बजाय इसको विकास के महाकुम्भ में अपने योगदान स्वरुप देखने की ज़रुरत है! यहाँ विकास हेतु विकल्प बहुआयामी हैं, चाहे पर्यटन हो, कृषि-बागवानी हो, पारम्परिक उत्पाद हों या औषधीय पौधों से आजीविका हो! बस ज़रुरत है तो इनको साकार करने की और ये साकार तभी होंगे, जब हम सब मिलकर इस ओर दृढ प्रयास करेंगे!

चम्बा रूमाल

चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं:

चम्बा एक अचम्भा है! चम्बा को इस लेख में पूर्ण-वर्णित कर पाना तो संभव नहीं, अतः अपने अगले लेख में  मैं चम्बा की विकास संभावनाओं पर कुछ और बातें आपसे अवश्य सांझा करूँगा!

आभार:  मेरा यह लेख चम्बा के प्रिय लोक-जन को समर्पित है! मैं सहृदय आभारी हूँ उन सब का, जो चम्बा क्षेत्र के सतत विकास हेतु निरन्तर कार्य कर रहे हैं! मैं आभारी हूँ चम्बा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले श्री मनुज शर्मा, श्री धर्म चंद और श्री उपमन्यु जी का, जिनके चंबा के विकास के प्रति प्रयासों ने मुझे इस लेख हेतु प्रेरित किया है!

और अंत में अपना यह लेख इन दो लोकप्रिय लोकगीतों के साथ समाप्त करने की आज्ञा चाहूँगा:

सांय-सांय मत कर राविए, मिंजो तेरा डर लगदा, चम्बे दिए लाड़लिये,

सांय-सांय मत कर राविए, टेढ़ी मेढ़ी चाल तेरी, सौ-सौ नखरे,

तेरे कंढे वसने जो दिल मेरा करदा, सांय सांय मत कर राविए, मिंजो तेरा डर लगदा

चल-चल राविए तू चम्बे जाए वसना, चम्बे देया लोकां कन्ने खेलना ते हंसना,

तेरे चम्बे वसने जो दिल मेरा करदा, मिंजो तेरा डर लगदा, सांय-सांय मत कर राविए!!   

………..

“माये नी मेरिये, शिमले दी राहें, चंबा कितनी क दूर,

शिमले नी वसना, कसौली नी वसना, ओ चम्बे जाना जरूर, चम्बे जाना जरूर”

…………..

………………………………………………………………………………………….

 

 

18 thoughts on “चम्बा क्षेत्र-विकास की संभावनाएं

  1. santosh kumar

    nice sir
    mujhe chamba ke itihaas bare mein itna malum nahi tha. So thanks. I am very appreciate with you

    Reply
    1. Amit Mehta Post author

      इन प्रेरणादायक शब्दों हेतु धन्यवाद संतोष जी! इस ब्लॉग के माध्यम से मेरा एक छोटा सा यह प्रयास है, अपने प्रदेश के जन-मानस को सतत विकास की ओर जाते हुए देखने का! इस ब्लॉग से जुड़े रहें! आगे भी आपसे अपने विचार और अनुभव सांझा करता रहूँगा!

      Reply
  2. हिमांशु जसरोटिया

    मैं आपके इस लेख से बहैत सहमत हूं, इसमे चम्बा के विकास के लिए जी सुझाव दिए गए हैं उनमें से कुछ के लिए हम भी प्रयासरत हैं।
    हमारी “मिसाल” नामक संस्था जल्द ही इस क्षेत्र में काम करने जा रही है, इस काम की सफलता के लिए आप जैसे बुद्धिमान व्यक्तियों के मार्गदर्शन की आवश्यकता रहेगी।

    आभार

    Reply
    1. Amit Mehta Post author

      प्रिय जसरोटिया जी! आप जैसे व्यक्तित्व ही मेरी प्रेरणा के स्त्रोत हैं! हिमाचल के कम गति से विकसित हो रहे क्षेत्रों के सतत विकास हेतु आप गतिशील रहें, मेरी यही शुभकामना है! एक तुच्छ सहायक के नाते मेरी ओर से किसी भी तरह की आवश्यकता हो तो नि:संकोच आदेश करें!
      जय हिन्द, जय हिमाचल!

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  3. Kamlesh KUMAR

    Good effort! agriculture side should be included in your topic on priority basis specially cash crops like peas ,beans, broccoli and potato there marketing as well as there branding diary products cereal products
    Much more a detailed and comprehensive study is needed and govt focus .

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    1. Amit Mehta Post author

      Thanks Kamlesh ji for your appreciation and kind words. It is always a greater challenge to describe any region in a single article. As far as cash crops are concerned, I have covered all of them in “Crop Term”. In my next article, I will put an effort to cover and focus on this aspect which you have highlighted.
      Of Course! This is matter of detailed and comprehensive research. I am assisting grass root level researchers and volunteers for assessing these concerns and I further hope that we together will be able to give our two cents in the developmental aspects of marginal and deprived areas of our state.

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  4. Nitin Gupta

    Very well summarised Amit ji.. we need a very positive mindset to bring positive changes in our region and ur post is just apt in the present situation. I think each and every individual of Chamba have strong feelings for their native place and are contributing in one sense or the other. People of Chamba are spiritually elevated and for said reason we see peace, happiness, brother hood in all sect and communities even in adverse circumstances. Our humility, softness and goodness has been seen as a weakness which is rather our strength and is to be highlighted on every front. Efforts like this will certainly help.
    Thanks Manuj bhai for sharing this blog and contributing in spreading peace and positivity.
    Balance is shifting from we could not do this to we can do it.
    Regards.
    Nitin Gupta.

    Reply
    1. Amit Mehta Post author

      Thanks Nitin Gupta ji for your kind feedback. Your words means a lot to me.
      Yes! I totally agree with you that we need a positive mind-set to bring a positive change in these areas. I am in Love with the people and culture of Chamba. I am always there to give my two cents for this noble cause. Thanks again!

      Reply
    1. Amit Mehta Post author

      प्रोत्साहन हेतु आपका सहृदय आभार ठाकुर जी!

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  5. Sanjay Charak

    I am glad to know the glorious past of my native district and would love to know more. So keep on enlightening us Amit ji.

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    1. Amit Mehta Post author

      Thanks Sanjay Ji for your kind words. These words mean a lot to me and will definitely keep me pushing towards sharing my little learning and experiences with my Brothers and sisters.
      Jai Hind, Jai Himachal!

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    1. Amit Mehta Post author

      चम्बा के ऊपर लिखे लेख पर हौंसला अफजाई हेतु आभार। जल्दी ही ऊना से सम्बंधित लेख लिखुंगा। आपका सहयोग व मार्गदर्शन अपेक्षित है।

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  6. Sanjay kumar

    Dear all, we need to work together for development of chamba. As well as himachal pradesh, and also I would like to covert attention of our current government for possibilities of torsiom in district chamba. Becouse only in district chamba is back word district, and hopefully there are so many possibilities we can generate in torsiom fields and same time we need to devolep road conditions.or road connectivity with villages.

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    1. Amit Mehta Post author

      Dear Sir! There are no doubt immense development possibilities in Chamba, as Chamba is Blessed with abundant natural resources.
      Most important thing which I feel is that we need to bridge gaps in our different communities by leaving own ego behind, castism and Area Based perceptions.
      Together we walk, Together we Grow! Thanks for your kind concerns.

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